अनकहा इश्क || Untold love❤️

अनकहा इश्क || Untold love❤️

अनकहा इश्क || Untold love❤️


इंसान को खुश रहने के लिए क्या चाहिए होता है ? 

बैंक खाते में बहुत सा रुपया पैसा ...?

फ्रैंडलिस्ट में हजारो नाम ? 

आपको या आपके विचारो को पसंद करने वाले कुछ लोग ?

भरा पूरा परिवार ? 

समाज में आपकी इज्जत ?

क्या ये सब काफी है किसी को खुश रखने के लिए ? 

मुझे लगता है ये तब तक नाकाफी है जब तक आपके पास कोई ये बताने वाला हो की " तुम्हरा पेट निकल रहा है , अब जिम शुरू कर लो ..."बैग देखा है अपना कितना गंदा हो रखा है , साफ करो इसे ," तुम्हे पता है तुम इतना जल्दी बोलते हो कि कई बार समझ ही नही आता  " ,कोई हो जो आपको बता सके की pink लड़कियो का रंग है .

शायद हमारी ख़ुशी तब तक अधूरी है जब तक आपके पास ऐसा कोई हो जिस के सामने आप दिमाग से नही दिल से बोलो। हम तब तक खुश नही हो सकते है जब तक हमारे पास कोई ऐसा हो जिसके सामने हम अपने चहरे पर लगाये गए सारे नकाब उतार के जा सके.....

घास में खेलते वक्त कभी कोई तीखा तिनका नरम उँगलियों में धँस जाता है , दिखता तो नहीं पर महसूस होता है कि कुछ है वहाँ, जिसकी चुभन है l सालों के साथ ज़िन्दगी भी ऐसे और बहुत से दर्द ले आती है , जो नज़र तो नहीं आते ,पर होते हैं... बेबसी होती है, बेचैनी होती है और खुद से कहीं भाग सकने की मजबूरी भी...

तस्वीरों में दर्द अक्सर छुप जाता है I जो रुके नहीं उन्हें रुकना ही नहीं था , जो साथ नहीं हैं वो साथ होना ही नहीं चाहते थे , मुमकिन नही था किसीका साथ रह पाना , कोई हमारे साथ रह सका और किसी के साथ हम रह पाए,

ऐसे मान के जीना आसान तो नहीं है लेकिन शायद बर्दाश्त करने के लायक बन जाता है , वरना ये जो एक जलन है सीने में , इसके अँधेरे में गुम हो जाते, मेरे साथ ही, मेरे सारे लफ्ज़... मेरे सारे शिकवे...

कॉलेज के दिनों जब हम उनसे पूछते कि "पढ़ाई की?" तो कहती "खूब पढ़े!" फिर हम कहते "इतना भी मत पढ़ा करो के खानापीना भूल जाओ" तो जवाब आता के "किसी एक को तो पढ़ना पड़ेगा ?" हम फिर हंस के पूछते "और अगर मेरा प्लेसमेंट हुआ तो?"

तो फट्ट से बोलती-

"तो? तो क्या? तो हम बारात लेके आजायेंगे!"

यही अनकहा इश्क है ❤️

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